उपरोक्त कथन के प्रारूप में यह भी कहा जा सकता है कि उद्देश्यहीन जीवन के होने का कोई अभिप्राय नहीं है। उद्देश्य ही जीवन के पथ को समझने एवं इस पर अग्रसर होने के मूल रूप को समझाता है।
मनुष्य और जानवर के जीने का अगर मूल अंतर पता किया जाये तो मनुष्य की संवेदनशीलता एवं उद्देश्यपरक ध्येय ही उसे अन्य प्राणियों से बेहतर बनाता है। आज का युवा वर्ग उद्देश्यों के प्रति या तो संवेदनहीन है या भौतिक सुविधा एवं सुक्ष्म उद्देश्यों को ही जीवन उद्देश्य मान रहा है जो की अतयंत दुर्भाग्यपूर्ण है।
हमे अपने जीवन के वास्तविक उद्देश्यों एवं उनके पूर्ण करने के पराक्रम का सम्पूर्ण ज्ञान होना आवश्यक है। एक वृहद् उद्देश्य कई छोटे एवं सूक्ष्म उद्देश्यों का समूह हो सकता है परन्तु प्रत्येक उद्देश्य अपने आप में पूर्ण है एवं उसे शत-प्रतिशत प्रयासों एवं लगन से प्राप्त किया जा सकता है।
स्वामी विवेकानद के शब्दों के साथ
"उठो, जागो और अपने उद्देश्य की प्राप्ति हेतु स्वयं को समर्पित कर दो "
अस्तु - सर्व मंगल मांगल्यं
मनुष्य और जानवर के जीने का अगर मूल अंतर पता किया जाये तो मनुष्य की संवेदनशीलता एवं उद्देश्यपरक ध्येय ही उसे अन्य प्राणियों से बेहतर बनाता है। आज का युवा वर्ग उद्देश्यों के प्रति या तो संवेदनहीन है या भौतिक सुविधा एवं सुक्ष्म उद्देश्यों को ही जीवन उद्देश्य मान रहा है जो की अतयंत दुर्भाग्यपूर्ण है।
हमे अपने जीवन के वास्तविक उद्देश्यों एवं उनके पूर्ण करने के पराक्रम का सम्पूर्ण ज्ञान होना आवश्यक है। एक वृहद् उद्देश्य कई छोटे एवं सूक्ष्म उद्देश्यों का समूह हो सकता है परन्तु प्रत्येक उद्देश्य अपने आप में पूर्ण है एवं उसे शत-प्रतिशत प्रयासों एवं लगन से प्राप्त किया जा सकता है।
स्वामी विवेकानद के शब्दों के साथ
"उठो, जागो और अपने उद्देश्य की प्राप्ति हेतु स्वयं को समर्पित कर दो "
अस्तु - सर्व मंगल मांगल्यं
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